Wednesday, 19 September 2012

दोस्ती प्रेम, चाह एवं लगाव 


का प्रस्फुटन 
शाखों से फूटती कलियों की तरह ही होता है

वैसे ही खूबसूरत, रंगीन और उम्मीदों से भरी हुई 
गहराने पर एक खिले फूल की तरह 
सामने आ जाता है 
उसका रंग, खुशबू और आकार 

फिर 
एक लम्बे वक्त के लिए थम जाता है सब 

बन जाता है एक रूटीन 
न कोई उम्मीद न ही ताजगी 
बस सम्भालना एक -दूजे को 
वक्त से गिरती पंखुरियों की तरह 

टूटने लगता है ठहराव 
दोस्ती, प्रेम, चाह एवं लगाव का 

फूल मुरझाने लगता है ...